06 अक्टूबर 2025 को नोबेल पुरस्कार 2025 के लिए विजेताओं की घोषणा की शुरूआत हुई सबसे पहले चिकित्सा के क्षेत्र में उसके बाद 07 अक्टूबर 2025 को भौतिकी (फिजिक्स) की 08 अक्टूबर 2025 को रसायन ( केमिस्ट्री) की 09 अक्टूबर 2025 को साहित्य (लिटरेचर) के नोबेल प्राइज 2025 की घोषणा 10 अक्टूबर 2025 को शांति (पीस) तथा आखिर में 13 अक्टूबर 2025 को अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) के नोबेल प्राइज 2025 की घोषणा की गई।
नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize 2025) विजेताओं की सूची
| क्षेत्र | नोबेल पुरस्कार 2025 प्राप्तकर्ता | विशेष कार्य / किसलिए |
|---|---|---|
| चिकित्सा मेडिसिन या फिजियोलॉजी (Medicine or Physiology) | मैरी ई. ब्रूनको (Mary E. Brunko), फ्रेड रैम्सडेल (Fred Ramsdell) शिमोन साकागुची (Shimon Sakaguchi) | परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता (पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस) से संबंधित उनकी खोजों के लिए |
| भौतिकी फिजिक्स (Physics) | जॉन क्लार्क (John Clarke) मिशेल एच. डेवोरेटे (Michel H. Devoret) जॉन एम. मार्टिनिस (John M. Martinis) | विद्युत परिपथ में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज के लिए |
| रसायन केमिस्ट्री (Chemistry) | सुसुमु कितागावा (Susumu Kitagawa) रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson) उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi) | धातु – कार्बनिक ढांचे के विकास के लिए |
| साहित्य (Literature) | लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई (László Krasznahorkai) | लास्जलो की रचानाएं सम्मोहक और दूरदर्शी कार्य के लिए, जो सर्वनाशकारी आतंक के बीच, कला की शक्ति की पुष्टि करता है |
| शांति (Peace) | मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) | वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक प्रयासों और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण के लिए उनके संघर्ष के लिए |
| अर्थशास्त्र इकोनॉमिक्स (Economics) | जोएल मोकिर (Joel Mokyr), फिलिफ अघियन (Philippe Aghion) पीटर हॉविट (Peter Howitt) | नवाचार-संचालित आर्थिक विकास की व्याख्या करने के लिए |
फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize in Physiology or Medicine 2025)
फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार 2025 प्रतिरक्षा प्रणाली के गार्ड्स खोजने वाले 03 वैज्ञानिकों – मैरी ई. ब्रुनको (Mary E. Brunkow) , फ्रेड राम्सडेल (Fred Ramsdell) और शिमोन सकागुची (Shimon Sakaguchi) – को दिया गया है, जिन्होंने पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस (परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता) के बारे में महत्वपूर्ण खोजें कीं। (for their discoveries concerning peripheral immune tolerance)
ये खोजें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को खुद पर हमला करने से रोकने में मदद करती हैं और कैंसर तथा ऑटोइम्यून बीमारियों के नए उपचारों का आधार बनी हैं।

फिजियोलॉजी या मेडिसिन नोबेल पुरस्कार 2025 के विजेताओं का विवरण
मैरी ई. ब्रुनको (संयुक्त राज्य अमेरिका) – जन्म 1961, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी। वर्तमान में इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी, सिएटल, यूएसए में सीनियर प्रोग्राम मैनेजर।
फ्रेड राम्सडेल (संयुक्त राज्य अमेरिका) – जन्म 1960, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिल्स से 1987 में पीएचडी। वर्तमान में सोनोमा बायोथेराप्यूटिक्स, सैन फ्रांसिस्को, यूएसए में साइंटिफिक एडवाइजर।
शिमोन सकागुची (जापान) – जन्म 1951, क्योटो यूनिवर्सिटी से 1976 में एमडी और 1983 में पीएचडी। वर्तमान में इम्यूनोलॉजी फ्रंटियर रिसर्च सेंटर, ओसाका यूनिवर्सिटी, जापान में डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर।
उनकी विशिष्ट खोजें प्रतिरक्षा प्रणाली में टी सेल्स (T-Cell) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो शरीर को संक्रमणों से बचाती हैं लेकिन खुद के ऊतकों पर हमला नहीं करतीं। थाइमस में सेंट्रल टॉलरेंस के माध्यम से स्व-प्रतिक्रियाशील टी सेल्स को हटाया जाता है, लेकिन कुछ बच जाती हैं।
इन वैज्ञानिकों ने दिखाया कि रेगुलेटरी टी सेल्स (Regulatory T-cells) इन बची हुई सेल्स को नियंत्रित करती हैं। शिमोन सकागुची की खोज- 1980 के दशक में, उन्होंने नवजात चूहों से थाइमस हटाने पर ऑटोइम्यून बीमारियां होने के प्रयोगों का अध्ययन किया। 1995 में, उन्होंने जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित किया कि CD4 और CD25 प्रोटीन वाली रेगुलेटरी टी सेल्स प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को दबाती हैं और स्व-सहिष्णुता बनाए रखती हैं। ये सेल्स अन्य टी सेल्स को शांत करके शरीर के ऊतकों पर हमले रोकती हैं।
मैरी ई. ब्रुनका और फ्रेड राम्सडेल की खोजें – 1990 के दशक में, उन्होंने स्कर्फी चूहों (Scurfy Mice) का अध्ययन किया, जिनमें X-लिंक्ड म्यूटेशन से ऑटोइम्यून लक्षण होते हैं। 2001 में, उन्होंने FOXP3 जीन की पहचान की, जो रेगुलेटरी टी सेल्स के विकास को नियंत्रित करता है। उन्होंने यह भी पाया कि मनुष्यों में FOXP3 म्यूटेशन IPEX सिंड्रोम (एक घातक ऑटोइम्यून विकार) का कारण बनता है। 2003 में, सकागुची और अन्यों ने पुष्टि की कि FOXP3 रेगुलेटरी टी सेल्स का मुख्य नियामक है।
प्रतिरक्षा प्रणाली की समझ में योगदान इन खोजों ने पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस की व्याख्या की, जो थाइमस के बाहर प्रतिरक्षा संतुलन बनाए रखती है। रेगुलेटरी टी सेल्स FOXP3 के माध्यम से स्व-प्रतिक्रियाशील टी सेल्स को दबाती हैं, जिससे शरीर की 10-15 से अधिक टी-सेल रिसेप्टर्स की विविधता के बावजूद ऑटोइम्यूनिटी रोकी जाती है। ये सेल्स संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा को शांत भी करती हैं।
चिकित्सा और स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभावये खोजें कैंसर उपचार में उपयोगी हैं, जहां ट्यूमर रेगुलेटरी टी सेल्स को भर्ती कर प्रतिरक्षा से बचते हैं; अब इन सेल्स को हटाने की रणनीतियां विकसित हो रही हैं। ऑटोइम्यून बीमारियों में, इंटरल्यूकिन-2 देकर या रोगी की रेगुलेटरी टी सेल्स को बढ़ाकर उपचार संभव है। प्रत्यारोपित अंगों की रक्षा के लिए संशोधित सेल्स का उपयोग हो रहा है। क्लिनिकल ट्रायल्स में ये तरीके परीक्षणाधीन हैं, जो कैंसर, ऑटोइम्यून विकारों और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जटिलताओं को कम कर मानव स्वास्थ्य सुधार सकते हैं।
भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize in Physics 2025)
2025 का भौतिकी (Physics) नोबेल पुरस्कार – जॉन क्लार्क (John Clarke) , मिशेल एच. डेवोरेटे (Michel H. Devoret) और जॉन एम. मार्टिनिस (John M. Martinis) को प्रदान किया गया है, ‘‘विद्युत सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज” (Discovery of Macroscopic Quantum Mechanical Tunnelling and Energy Quantisation in an Electric Circuit) के लिए।
यह पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को घोषित किया गया, और पुरस्कार राशि 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर है, जो तीनों विजेताओं के बीच समान रूप से बांटी जाएगी।

फिजिक्स नोबेल पुरस्कार 2025 के विजेताओं का विवरण
जॉन क्लार्क (John Clarke) जन्म 1942, कैम्ब्रिज, यूके में। पीएचडी 1968 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से। वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले, यूएसए में फिजिक्स के प्रोफेसर है। प्रमुख कार्य – सुपरकंडक्टिव इलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष रूप से सुपरकंडक्टिव क्वांटम इंटरफेरेंस डिवाइस (SOUID) के विकास में योगदान और क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन पर शोध।
मिशेल एच. डेवोरेट (Michel H. Devoret) जन्म 1953, पेरिस, फ्रांस में। पीएचडी 1982 में पेरिस-सुद विश्वविद्यालय से। वर्तमान में येल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एप्लाइड फिजिक्स, गूगल क्वांटम एआई में मुख्य वैज्ञानिक है। प्रमुख कार्य – सर्किट क्वांटम, इलेक्ट्रोडायनेमिक्स, क्वांट्रोनिक्स, सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स।
जॉन एम. मार्टिनिस (John M. Martinis) जन्म 1958 यूएसएस में। पीएचडी 1987 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से। वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया यूएसए में प्रोफेसर। प्रमुख कार्य – सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स, क्वांटम कंम्प्यूटिंग।
इन वैज्ञानिकों ने 1984 और 1985 में किए गए प्रयोगों के माध्यम से एक विद्युत सर्किट में क्वांटम मैकेनिकल प्रभावों को मैक्रोस्कोपिक स्तर पर प्रदर्शित किया।
उन्होंने सुपरकंडक्टर (ऐसे पदार्थ जो विद्युत धारा को बिना प्रतिरोध के प्रवाहित करते हैं) से बने घटकों का उपयोग किया, जिन्हें एक पतली गैर-कंडक्टिव सामग्री की परत से अलग किया गया था। इसे जोसेफसन जंक्शन कहा जाता है। इस सेटअप ने एक मैक्रोस्कोपिक सिस्टम बनाया, जहां चार्ज्ड पार्टिकल्स एक ही पार्टिकल की तरह व्यवहार करते थे, जो पूरे सर्किट को भरता था।
मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंगरू सिस्टम जीरो-वोल्टेज अवस्था में शुरू होता है, जो एक बैरियर के पीछे फंसा होता है। यह अवस्था से टनलिंग के माध्यम से निकलता है, जिससे वोल्टेज उत्पन्न होता है, जो इसकी क्वांटम प्रकृति को दर्शाता है।
ऊर्जा क्वांटीकरण- सिस्टम केवल विशिष्ट मात्रा में ऊर्जा को अवशोषित या उत्सर्जित करता है, जैसा कि क्वांटम मैकेनिक्स द्वारा भविष्यवाणी की गई है।
ये प्रयोग भौतिकी की एक प्रमुख प्रश्न का उत्तर देते हैं- एक सिस्टम कितना बड़ा हो सकता है जहां क्वांटम मैकेनिकल प्रभाव दिखाई दें? उन्होंने दिखाया कि क्वांटम गुण, जैसे टनलिंग (जहां एक पार्टिकल बैरियर से होकर गुजरता है), मैक्रोस्कोपिक स्तर पर भी बने रह सकते हैं, भले ही बड़े पार्टिकल्स की संख्या के साथ ऐसे प्रभाव आमतौर पर कम हो जाते हैं।
क्वांटम मैकेनिक्स सभी डिजिटल तकनीकों की आधारशिला है, जैसे कंप्यूटर माइक्रोचिप्स में ट्रांजिस्टर।
इन विजेताओं के कार्य ने अगली पीढ़ी की क्वांटम तकनीकों के लिए दरवाजे खोले हैं, जिसमें क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम सेंसर शामिल हैं। यह पुरस्कार क्वांटम भौतिकी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भविष्य की तकनीकों को प्रभावित करेगा।
केमिस्ट्री (रसायन) का नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize in Chemistry 2025)
2025 का रसायन (Chemistry) नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को प्रदान किया गया है – सुसुमु कितागावा (Susumu Kitagawa) जापान, रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson) ऑस्ट्रेलिया और उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi) अमेरिका। यह पुरस्कार मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) के विकास के लिए (धातु-कार्बनिक ढांचे के विकास के लिए) दिया गया है। (Development of Metal–Organic Frameworks)
पुरस्कार की कुल राशि 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर है, जो तीनों विजेताओं के बीच समान रूप से बांटी जाएगी।

केमिस्ट्री (रसायन) का नोबेल पुरस्कार विजेताओं का परिचय
सुसुमु कितागावा (Susumu Kitagawa) – जन्म 1951 में क्योटो, जापान में हुआ है। जापान के क्योटो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। उन्होंने 1969 में क्योटो विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की।
रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson) – जन्म 1937 में ग्लसबर्न, यूके में हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। उनका उन्होंने 1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की।
उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi) – जन्म 1965 में अम्मान, जॉर्डन में हुआ था। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में प्रोफेसर। उन्होंने 1990 में इलिनोइस विश्वविद्यालय अर्बाना-शैंपेन से पीएचडी प्राप्त की।
ये वैज्ञानिक मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) नामक छिद्रयुक्त सामग्रियों के विकास के लिए जाने जाते हैं, जो गैसों और रसायनों को संग्रहित करने और अलग करने में उपयोगी हैं।
मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) क्या होते हैं? छिद्रयुक्त सामग्रियों के एक तरह की छिद्रयुक्त जैसी रचना (नेटवर्क) होती है जो धातुओं और कार्बन वाले अणुओं से बनी होती है। इसके अंदर बहुत सारे खाली छेद या जगहें होती हैं, जिनसे गैसें या तरल पदार्थ अंदर-बाहर आ-जा सकते हैं।
पुरस्कार का कारण ये वैज्ञानिकों ने मेटल आयनों को कोने के पत्थरों के रूप में उपयोग करके लंबी ऑर्गेनिक (कार्बन-आधारित) अणुओं से जुड़कर क्रिस्टल बनाए, जिनमें बड़े-बड़े छिद्र होते हैं।
इन छिद्रयुक्त संरचनाओं को मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) कहा जाता है, जो विशिष्ट पदार्थों को चुनिंदा रूप से पकड़ने और संग्रहित करने की क्षमता रखते हैं।
मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स में अपार क्षमता है, जो पहले से अनदेखी संभावनाएं प्रदान करते हैं और नए कार्यों वाली कस्टम-मेड सामग्रियों के लिए अवसर देते हैं।
रिचर्ड रॉबसन ने MOF की शुरूआत की इस विकास की आरंभ 1989 में रिचर्ड रॉबसन से हुई, जब उन्होंने सकारात्मक रूप से चार्ज्ड कॉपर आयनों को चार-हाथ वाली ऑर्गेनिक अणु से जोड़कर एक व्यवस्थित, विशाल क्रिस्टल संरचना बनाई, जो हीरे जैसी थी।
हालांकि, यह प्रारंभिक संरचना अस्थिर थी और आसानी से ढह जाती थी।
1992 से 2003 के बीच, सुसुमु कितागावा और उमर एम. याघी ने स्वतंत्र रूप से क्रांतिकारी खोजें कीं, जो रॉबसन की विधि को मजबूत आधार प्रदान करती हैं।
कितागावा ने दिखाया कि इन संरचनाओं में गैसें प्रवेश और निकास कर सकती हैं, और उन्होंने अनुमान लगाया कि MOFs को लचीला बनाया जा सकता है।
उमर एम. याघी ने पहली बार 1995 में पहली बार मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) शब्द का इस्तेमाल किया और 1999 में MOFs नाम से फेमस फ्रेमवर्क बनाया।
एक अत्यधिक स्थिर MOF बनाया और दिखाया कि इसे तर्कसंगत डिजाइन से संशोधित किया जा सकता है ताकि नई और वांछित गुण प्राप्त हों।
इन सफलताओं के बाद, रसायनज्ञों ने विभिन्न बिल्डिंग ब्लॉक्स बदलकर दसियों हजार विभिन्न MOFs का निर्माण किया है।
ये संरचनाएं रासायनिक प्रतिक्रियाओं को चलाने या बिजली संचालित करने के लिए डिजाइन की जा सकती हैं।
मूल रूप से, ये रसायन के लिए कमरे प्रदान करती हैं, जहां परमाणुओं की अंतर्निहित गुणों का उपयोग करके कार्यात्मक सामग्रियां बनाई जाती हैं।
MOFs – में धातु आयन कोने के रूप में कार्य करते हैं, जो लंबी कार्बन-आधारित अणुओं से जुड़ते हैं।
उनके कार्यों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है और दिखाया है कि शांतिपूर्ण प्रतिरोध दुनिया बदल सकता है।
ये क्रिस्टल में बड़े छिद्र बनाते हैं, जो छिद्रयुक्त होते हैं और चुनिंदा रूप से पदार्थों को पकड़ सकते हैं।
2025 में, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जो उनके लोकतंत्र के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष को मान्यता देता है।
उनकी टीम ने एरिजोना के रेगिस्तानी हवा से पानी स्टोर किया। रात में MOF हवा से नमी सोखता है और सुबह सूर्य की गर्मी से वही नमी पानी में बदल जाती है।
उदाहरण के लिए, ये जहरीली गैसों को संग्रहित कर सकते हैं, रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित कर सकते हैं, या कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ सकते हैं।
प्रभाव और अनुप्रयोग MOFs वैश्विक चुनौतियों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जैसे कि पानी से PFAS (पर- और पॉलीफ्लोरोअल्काइल पदार्थों) को अलग करना, पर्यावरण में दवाओं के ट्रेस को तोड़ना, कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ना, और रेगिस्तानी हवा से पानी निकालना।
यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है –
पानी से प्रदूषक या जैसे हानिकारक रसायन हटाने में।
वायु से कार्बन डाइऑक्साइड साफ करने में।
रेगिस्तान की हवा से पानी निकालने के लिए।
फल से निकलने वाली एथिलीन गैस को रोकने में जिससे फल धीरे-धीरे पके।
हाइड्रोजन या मीथने जैसी गैसों को सुरक्षित रूप से स्टोर करने में।
शरीर मेें दवाओं को नियंत्रित तरीके से पहुंचाने के लिए।
ये सामग्रियां गैसों, रसायनों और पर्यावरणीय प्रदूषकों को कुशलतापूर्वक संभालने में मदद करती हैं, जो मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों को सुलझाने में योगदान देती हैं।
साहित्य का नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize in Literature 2025)
2025 का साहित्य (Literature) का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई (László Krasznahorkai) को मिला है।
स्वीडिश एकेडमी ने 9 अक्टूबर 2025 को इसका ऐलान किया।
स्वीडिश एकेडमी ने कहा है कि “लास्जलो की रचानाएं सम्मोहक और दूरदर्शी कार्य के लिए, जो सर्वनाशकारी आतंक के बीच, कला की शक्ति की पुष्टि करता है” (for his compelling and visionary oeuvre that, in the midst of apocalyptic terror, reaffirms the power of art)
लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रूपए), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट दिया जायेगा। पुरस्कार 10 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम में प्रदान किया जायेगा।

लास्ज़्लो क्रास्नाहोर्काई (Laszlo Krasznahorkai) का जन्म 5 जनवरी 1954 को हंगरी के ग्यूला शहर में हुआ था।
उनके पिता ग्योर्गी क्रास्नाहोर्काई एक वकील थे, जबकि मां जूलिया पालिंकास सामाजिक सुरक्षा प्रशासक थीं। उन्होंने 1972 में एर्केल फेरेंक हाई स्कूल से स्नातक किया।
1973 से 1976 तक उन्होंने जोजेफ अटिला विश्वविद्यालय (अब सेजेड विश्वविद्यालय) में कानून की पढ़ाई की, और 1976 से 1978 तक बुडापेस्ट के इओटवोस लोरांड विश्वविद्यालय (ईएलटीई) में।
1978 से 1983 तक उन्होंने ईएलटीई के मानविकी संकाय में हंगेरियन भाषा और साहित्य का अध्ययन किया, जहां उन्होंने लेखक सैंडोर माराई के कार्यों पर थीसिस लिखी। पढ़ाई के दौरान वे गोन्डोलाट कोन्यवकियाडो प्रकाशन कंपनी में काम करते थे।
विश्वविद्यालय पूरा करने के बाद से, क्रास्नाहोर्काई एक स्वतंत्र लेखक के रूप में जीवित हैं। 1985 में उनकी पहली उपन्यास “सैटेंटैंगो” (Satantango) की सफलता ने उन्हें हंगेरियन साहित्यिक जीवन में प्रमुख स्थान दिलाया। वर्ष 1994 में इस किताब पर सैटेंटैंगो नाम से ही 07 घंटें लंबी फिल्म भी बनाई गई थी। इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ आर्टहाउस फिल्मों में से एक माना जाता है।
1987 में वे पहली बार कम्युनिस्ट हंगरी से बाहर गए और पश्चिम बर्लिन में एक वर्ष के लिए डीएएडी फेलोशिप प्राप्त की।
सोवियत रूस के पतन के बाद, उन्होंने विभिन्न स्थानों पर निवास किया, जिसमें पूर्वी एशिया में महत्वपूर्ण समय शामिल है – 1990 से मंगोलिया और चीन की यात्राओं से प्रेरित होकर द प्रिजनर ऑफ उरगा और डिस्ट्रक्शन एंड सॉरो बिनिथ द हेवन्स जैसे कार्य लिखे।
वे 1996, 2000 और 2005 में क्योटो में छह महीने रहे, जहां पूर्वी सौंदर्यशास्त्र और साहित्यिक सिद्धांत ने उनकी शैली और विषयों को प्रभावित किया।
उन्होंने अमेरिका, स्पेन, ग्रीस, जापान, जर्मनी और हंगरी में भी समय बिताया।
क्रास्नाहोर्काई की दो शादियां हुईं – 1990 में अनिको पेलीहे से और 1997 में डोरा कोप्सैनी (एक सिनोलॉजिस्ट और ग्राफिक डिजाइनर) से शादी की।
1996 में वे बर्लिन के विज्ञान स्कोलेज में अतिथि थे। कई वर्ष बर्लिन में रहने के बाद, जहां वे फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन में एस. फिशर गेस्ट प्रोफेसर रहे, अब वे हंगरी के स्जेंटलास्ज्लो की पहाड़ियों में एकांतवासी जीवन जीते हैं।
लेखन शैली – क्रास्नाहोर्काई कठिन और मांग वाले उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर पोस्टमॉडर्न, डिस्टोपियन और उदासीन विषयों से भरे होते हैं। उनकी रचनाओं में लंबे, घुमावदार वाक्य होते हैं, जो फुल स्टॉप से रहित होते हैं, और वे ग्रोटेस्क अतिरेक और निरंतर तीव्रता से युक्त हैं। आलोचक उन्हें गोगोल, मेलविल, काफ्का, थॉमस बर्नहार्ड और मध्य यूरोपीय महाकाव्य परंपरा से तुलना करते हैं। नोबेल समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने उनकी गद्य को बहते हुए वाक्यविन्यास के साथ विकसित बताया। सुसान सोनटाग ने उन्हें ‘समकालीन हंगेरियन मास्टर ऑफ एपोकैलिप्स‘ कहा, जबकि डब्ल्यूजी सेबाल्ड ने उनकी दृष्टि की सार्वभौमिकता की प्रशंसा की। साहित्यिक आलोचक जेम्स वुड ने नोट किया कि उनकी किताबें ‘दुर्लभ मुद्रा की तरह पास की जाती हैं‘।
लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई प्रमुख रचनाएं उपन्यास
सैटेंटैंगो (Satantango) (1985) – ग्रामीण समुदाय के पतन का उदास चित्रण; बेला टार द्वारा फिल्म रूपांतरित; 2013 में बेस्ट ट्रांसलेटेड बुक अवॉर्ड।
द मेलान्कोली ऑफ रेजिस्टेंस (Melancholy of Resistance) (1989) – 1993 में जर्मन बेस्टेनलिस्टे-प्राइज; बेला टार द्वारा वर्कमेस्टर हार्माेनीज फिल्म।
द प्रिजनर ऑफ उरगा (1992) – मंगोलिया और चीन से प्रेरित।
वार एंड वार (1999) – यूरोप यात्रा के दौरान पूरा।
डिस्ट्रक्शन एंड सॉरो बिनिथ द हेवन्स – चीन से प्रेरित।
सियोबो देयर बिलो अमेरिका, स्पेन, ग्रीस, जापान से प्रेरित; 2014 में बेस्ट ट्रांसलेटेड बुक अवॉर्ड।
बैरन वेन्केहीम होम कमिंग – नेशनल बुक अवॉर्ड के लिए नामांकित।
नॉवेल और लघु कथाएं –
माउंटेन टू द नॉर्थ, ए लेक टू द साउथ, पाथ्स टू द वेस्ट, ए रिवर टू द ईस्ट (2003)।
द लास्ट वुल्फ (2009)।
एनिमलइनसाइड (2010) – मैक्स न्यूमैन के साथ सहयोग।
स्पेडवर्क फॉर ए पैलेस (2018)।
चेसिंग होमर (2019) – इलस्ट्रेटेड; जैज संगीत के साथ।
रिलेशंस ऑफ ग्रेस (1986) – लघु कथा संग्रह।
द वर्ल्ड गोस ऑन (2013) – लघु कथा संग्रह।
अन्य निबंध, साक्षात्कार और डायरी जैसे – ‘द यूनिवर्सल थीसियस, इवनिंग एट सिक्स, क्रास्नाहोर्काईरू कन्वर्सेशंस, द मैनहट्टन प्रोजेक्ट।
लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई (László Krasznahorkai) के पुरस्कार –
डीएएडी फेलोशिप (1987), जर्मन बेस्टेनलिस्टे-प्राइज (1993), स्पाइकर लिटरेचरप्राइज (2010), बेस्ट ट्रांसलेटेड बुक अवॉर्ड (2013 और 2014), कोसुथ प्राइज (हंगरी का सर्वाेच्च राज्य पुरस्कार), 2015 मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज, और 2019 नेशनल बुक अवॉर्ड फॉर ट्रांसलेटेड लिटरेचर। वर्ष 2025 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार के कारण स्वीडिश अकादमी ने उनकी रचनाओं को ‘आकर्षक और दूरदर्शी‘ बताया, जो सर्वनाशी आतंक के बीच कला की शक्ति की पुष्टि करती हैं। उनकी रचनाएं मानव अस्तित्व की नाजुकता और आशा की जिद पर केंद्रित हैं।
2025 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025)
2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) को प्रदान किया गया है।
नार्वेजियन नोबेल समिति ने उन्हें “वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक प्रयासों और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण के लिए उनके संघर्ष के लिए” यह पुरस्कार दिया है।
वे वेनेजुएला में लोकतंत्र आंदोलन की प्रमुख नेता हैं और हाल के समय में लैटिन अमेरिका में नागरिक साहस का एक असाधारण उदाहरण हैं।
यह पुरस्कार 10 दिसंबर 2025 को ओस्लो, नॉर्वे में एक समारोह में प्रदान किया जाएगा।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा – मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को काराकास, वेनेजुएला में हुआ था।
उनके पिता हेनरिक मचाडो जुलोआगा एक स्टील व्यवसायी थे, और मां कोरिना पेरिस्का एक मनोवैज्ञानिक।
उन्होंने एंड्रेस बेलो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की और काराकास के इंस्टीट्यूट ऑफ हायर स्टडीज ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (IESA) से फाइनेंस में मास्टर डिग्री हासिल की।
2009 में, उन्होंने येल यूनिवर्सिटी के वर्ल्ड फेलोज प्रोग्राम में भाग लिया।
1992 में, तीन बच्चों की मां के रूप में, उन्होंने फाउंडेशन एटेनिया की स्थापना की, जो निजी दान से काराकास में अनाथ और अपराधी सड़क बच्चों की देखभाल करती थी, और वे ऑपर्चुनिटास फाउंडेशन की चेयर भी रहीं।
बाद में, वे वैलेंसिया में ऑटो इंडस्ट्री में काम करने के बाद 1993 में काराकास चली गईं।
राजनीतिक करियर – मारिया कोरिना ने 2002 में राजनीति में प्रवेश किया, जब उन्होंने एलेजांद्रो प्लाज के साथ वोट-मॉनिटरिंग ग्रुप सुमाते की स्थापना की।
सुमाते ने 2004 में राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के रिकॉल रेफरेंडम के लिए याचिका अभियान चलाया। रेफरेंडम के बाद, उन्हें और अन्य सदस्यों पर नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) से वित्तीय सहायता लेने के लिए देशद्रोह और साजिश के आरोप लगाए गए।
2010 में, वे नेशनल असेंबली के लिए चुनी गईं, जहां उन्होंने देश में सबसे अधिक वोट प्राप्त किए।
वे 2011 से 2014 तक नेशनल असेंबली में रहीं, लेकिन 2014 में उन्हें हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने ओएएस में वेनेजुएला के विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा के लिए पनामा के वैकल्पिक दूत के रूप में काम किया।
2011 में, उन्होंने 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी शुरू की, जहां उन्होंने पॉपुलर कैपिटलिज्म को बढ़ावा दिया। वे प्राइमरी में हेनरिक कैप्रिल्स से हार गईं, लेकिन उनका समर्थन किया।
वे वेंटे वेनेजुएला पार्टी की नेशनल कोऑर्डिनेटर हैं और 2018 में बीबीसी की 100 वुमन लिस्ट में शामिल हुईं।
2025 में, टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक नामित किया।
प्रमुख घटनाएं और उपलब्धियां – मारिया कोरिना ने 2014 के वेनेजुएला विरोध प्रदर्शनों में प्रमुख भूमिका निभाई।
उन्हें कई हमलों का सामना करना पड़ा।
वे राज्य संस्थाओं के निजीकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और मानवीय आधार पर विदेशी हस्तक्षेप का समर्थन करती हैं।
उनकी उपलब्धियों में 2005 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से मिलना, 2009 में येल वर्ल्ड फेलोज प्रोग्राम में चयन, और कई पुरस्कार जैसे 2015 का कैडिज कोर्टेस इबेरो-अमेरिकन फ्रीडम प्राइज, 2019 का लिबरल इंटरनेशनल प्राइज फॉर फ्रीडम, 2024 का वाक्लाव हावेल ह्यूमन राइट्स प्राइज और सखारोव प्राइज (एडमुंडो गोंजालेज उर्रुटिया के साथ साझा) शामिल हैं।
उन्होंने 2024 राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्राइमरी में भाग लिया और जीत हासिल की, लेकिन उन्हें 15 वर्षों के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।
उन्होंने एडमुंडो गोंजालेज उर्रुटिया का समर्थन किया, जिन्होंने चुनाव में भाग लिया। चुनाव के बाद, विपक्ष ने दावा किया कि उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन मदुरो शासन ने परिणामों को अस्वीकार कर दिया।
मारिया कोरिना को गंभीर धमकियों का सामना करना पड़ा और वे छिपकर रह रही हैं, लेकिन देश में ही बनी हुई हैं। 2024 में, उन्होंने चुनाव पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया और वोटों का दस्तावेजीकरण सुनिश्चित किया।
9 जनवरी 2025 को, एक रैली के बाद मदुरो शासन द्वारा उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया।
मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) लोकतंत्र की रक्षा करने वाली उन बहादुर महिलाओं और पुरुषों का प्रतीक हैं जिन्होंने दमन का सामना किया है। मारिया आज वनेजुएला में लोकतंत्र और साहस की पहचान बन चुकी है।
अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार 2025 (Economics Nobel Prize 2025)
2025 के नोबेल पुरस्कार में अर्थशास्त्र (स्वीडन के रिक्सबैंक द्वारा अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में प्रदान किया जाने वाला पुरस्कार) की घोषणा 13 अक्टूबर 2025 को की गई।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) नोबेल पुरस्कार को जोएल मोकिर (Joel Mokyr), फिलिफ अघियन (Philippe Aghion) और पीटर हॉविट (Peter Howitt) को प्रदान करने का निर्णय लिया है।
अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार 2025 “नवाचार-संचालित आर्थिक विकास की व्याख्या करने के लिए” (for having explained innovation-driven economic growth) दिया गया।
पुरस्कार राशि 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर) है, जिसमें से आधी राशि (50%) जोएल मोकिर को और बाकी आधी फिलिफ अघियन तथा पीटर हॉविट को संयुक्त रूप से मिलेगी।
यह पुरस्कार औद्योगिक क्रांति के बाद लगातार आर्थिक विकास के रहस्यों को उजागर करने वाले उनके योगदान को मान्यता देता है, जो मानव इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार 2025 के विजेताओं का परिचय
जोएल मोकिर (Joel Mokyr) – जन्म 1946 में नीदरलैंड्स के लीडेन में हुआ है। उन्होंने 1974 में येल विश्वविद्यालय (अमेरिका) से पीएचडी प्राप्त की। वर्तमान में वे अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और आर्थिक इतिहास के विशेषज्ञ हैं। उन्हें पुरस्कार की आधी राशि तकनीकी प्रगति के माध्यम से निरंतर विकास के लिए पूर्वापेक्षाओं की पहचान करने के लिए मिली है।
फिलिफ अघियन (Philippe Aghion) – जन्म 1956 में फ्रांस के पेरिस में हुआ है। 1987 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय (अमेरिका) से पीएचडी। वे फ्रांस के कॉलेज डी फ्रांस, आईएनएसईएडी (पेरिस) और ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में प्रोफेसर हैं।
पीटर हॉविट (Peter Howitt) – जन्म 1946 में कनाडा में हुआ है। 1973 में नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय (अमेरिका) से पीएचडी। वे अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।
अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार क्यों?
आर्थिक विकास का रहस्य मानव इतिहास के अधिकांश काल में जीवन स्तर स्थिर रहा, भले ही कभी-कभी आविष्कार होते रहे। लेकिन औद्योगिक क्रांति (लगभग 200 वर्ष पूर्व ब्रिटेन में शुरू) ने एक चक्र प्रारंभ किया, जहां नवाचार निरंतर होते रहे, जिससे ब्रिटेन और स्वीडन जैसे देशों में प्रति वर्ष 1.5 – 2% की स्थिर वृद्धि हुई। यह विकास केवल जीडीपी में नहीं, बल्कि चिकित्सा, सुरक्षा, भोजन, संचार और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के रूप में दिखा।
विजेताओं ने समझाया कि क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन (रचनात्मक विनाश) कैसे पुरानी तकनीकों को नई से बदलकर स्व-निरंतर प्रगति पैदा करता है, लेकिन यह स्थापित हितों को चुनौती भी देता है। उनके कार्य ने दिखाया कि वैज्ञानिक सफलताओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच कैसे फीडबैक लूप बनता है, जो विकास को गति देता है।
प्रमुख योगदान विस्तार से विजेताओं के योगदान अलग-अलग दृष्टिकोणों से पूरक हैं, जो आर्थिक इतिहास, सिद्धांत और मॉडलिंग को जोड़ते हैं।
जोएल मोकिर का योगदान – एक आर्थिक इतिहासकार के रूप में, मॉकीर ने दिखाया कि वैज्ञानिक सफलताओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच कैसे मजबूत संबंध बनता है, जो स्व-उत्पन्न प्रक्रिया से निरंतर विकास को जन्म देता है। उन्होंने उपयोगी ज्ञान को दो भागों में बांटारू प्रोपोजिशनल नॉलेज (सैद्धांतिक समझ, जैसे गणित या प्राकृतिक दर्शन में क्यों की व्याख्या) और प्रिस्क्रिप्टिव नॉलेज (व्यावहारिक निर्देश, जैसे रेसिपी या डिजाइन)।
औद्योगिक क्रांति से पहले, नवाचार मुख्यतः प्रिस्क्रिप्टिव पर आधारित थे, बिना सैद्धांतिक आधार के, जिससे वे सीमित रहते थे उदाहरणस्वरूप, अनंत गति वाली मशीनें असफल रहीं।
16वीं-17वीं शताब्दी की वैज्ञानिक क्रांति (एनलाइटनमेंट का हिस्सा) ने सटीक माप, नियंत्रित प्रयोग और पुनरावृत्ति लाकर इन दोनों को जोड़ा, जिससे फीडबैक लूप बने। उदाहरण वाष्प इंजन के सुधार वायुमंडलीय दबाव के ज्ञान से हुए, और स्टील उत्पादन ऑक्सीजन के कार्बन-कमी वाले प्रभाव से आगे बढ़ा।
मोकिर ने जोर दिया कि विचारों को उत्पादों में बदलने के लिए व्यावहारिक, तकनीकी और वाणिज्यिक ज्ञान जरूरी है। ब्रिटेन की सफलता कुशल कारीगरों और इंजीनियरों के कारण हुई, जो डिजाइनों को व्यावसायिक बनाते थे (जैसे लियोनार्डाे दा विंची का हेलीकॉप्टर विचार अमल में नहीं आया)। इसके अलावा, समाज का परिवर्तन के प्रति खुलापन आवश्यक है, क्योंकि नवाचार विजेताओं-हारने वालों पैदा करता है। एनलाइटनमेंट-युग की संस्थाएं, जैसे ब्रिटिश संसद, ने समझौतों को सुगम बनाया और परिवर्तन के अवरोध कम किए। प्रोपोजिशनल नॉलेज प्रतिरोध का मुकाबला करता है उदाहरण इग्नाज़ सेमेलवाइस का हाथ धोने का सुझाव बैक्टीरिया के प्रमाण से तेजी से फैल सकता था।
मोकिर का विश्लेषण इन पूर्वापेक्षाओं अन्योन्याश्रित ज्ञान, कुशल क्रियान्वयन और सामाजिक खुलापन को स्थिरता से बचाने और विकास के परिवर्तनकारी प्रभावों को सक्षम बनाने के रूप में चिह्नित करता है।
फिलिफ अघियन और पीटर हॉविट का संयुक्त योगदान – 1982 की उनकी संयुक्त प्रकाशन में, उन्होंने क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन का पहला मैक्रोइकोनॉमिक मॉडल विकसित किया, जिसमें सामान्य संतुलन शामिल है, जो फर्म-स्तरीय नवाचारों से अर्थव्यवस्था-व्यापी निरंतर विकास की व्याख्या करता है। मॉडल में कंपनियां आरएंडडी (शोध एवं विकास) में निवेश कर उत्पादन प्रक्रियाओं और उत्पादों को बेहतर बनाती हैं, जिससे वे मौजूदा कंपनियों को पछाड़ती हैं। अग्रणी फर्में पेटेंट से अस्थायी एकाधिकार प्राप्त करती हैं, उत्पादन लागत से अधिक लाभ कमाती हैं, लेकिन प्रतिद्वंद्वियों के नवाचारों से खतरा बना रहता है यह सीढ़ी जैसी प्रतिस्पर्धा पैदा करता है।
यह प्रक्रिया रचनात्मक (पिछले ज्ञान पर आधारित) लेकिन विनाशकारी (पुराने उत्पाद अव्यवहारिक हो जाते हैं) है, जो वास्तविक दुनिया को प्रतिबिंबित करती है अमेरिका में प्रतिवर्ष 10% से अधिक कंपनियां असफल होती हैं और नई शुरू होती हैं, नौकरियों में उच्च परिवर्तन होता है।
उनका मॉडल उत्पादन, आरएंडडी, वित्तीय बाजारों और घरेलू बचत (वृद्धि से जुड़ी ब्याज दरों से प्रभावित) को एकीकृत करता है, जो आरएंडडी के लिए प्रोत्साहन (सीढ़ी चढ़ने के लिए) और विनाश की गति (तेज नवाचार से छोटे एकाधिकार) के बीच संतुलन दिखाता है।
कल्याण प्रभावों का विश्लेषण – निजी आरएंडडी प्रोत्साहन सामाजिक लाभों को कम आंकते हैं, क्योंकि हारने वाले नवाचारों का संचयी ज्ञान मूल्य रहता है, इसलिए सब्सिडी सुझाई जाती है; लेकिन बिजनेस स्टीलिंग से मामूली सुधारों पर अत्यधिक आरएंडडी हो सकता है, अति सब्सिडी के खिलाफ तर्क देता है। इष्टतम आरएंडडी स्तर बाजार और समय पर निर्भर करता है, जो नीति डिजाइन में सहायक है। उनका कार्य बाजार एकाग्रता (बहुत अधिक या कम नवाचार बाधित करता है, हाल की वृद्धि मंदी की व्याख्या करता है), श्रम प्रभाव (उच्च विनाश बेरोजगारी पैदा करता है, फ्लेक्सिक्योरिटी प्रणाली कारकों की सुरक्षा के साथ गतिशीलता की पक्षधर), और नवाचारकों के लिए सामाजिक गतिशीलता पर आगे के शोधों को प्रेरित किया।
यह विकास के खतरे, जैसे बाजार प्रभुत्व या विचारों पर प्रतिबंध, को रेखांकित करता है, और आधुनिक मुद्दों पर लागू होता है जैसे एआई ज्ञान फीडबैक को तेज करता है, या नीतियां नकारात्मक प्रभावों (जलवायु परिवर्तन, असमानता) को संबोधित करती हैं।
यह पुरस्कार आर्थिक नीतियों, नवाचार प्रोत्साहन और सामाजिक परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो आज की वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु संकट और तकनीकी असमानता से निपटने में सहायक होगा।


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