Last Updated on October 17, 2026 by gktimehindi
सुखना वेटलैंड (Sukhna Wetland) – चंडीगढ़ और सौज झील (Sauj Jheel) – मैनपुरी, उत्तर प्रदेश दोनों को 15 अक्टूबर 2026 को रामसर साइट का दर्जा मिला।
इसके साथ अब भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 103 हो गई है। दो नए स्थल शामिल किए गए हैं:
सुखना आर्द्रभूमि (Sukhna Wetland / सुखना झील) — चंडीगढ़
सौज झील (Sauj Jheel) — मैनपुरी जिला, उत्तर प्रदेश
ये भारत के 102वें और 103वें रामसर स्थल हैं (रामसर सूची में क्रमशः साइट नंबर 2602 और 2603)।
सुखना वेटलैंड (Sukhna Wetland), चंडीगढ़
स्थान और प्रकृति:
यह चंडीगढ़ के किनारे, शिवालिक पहाड़ियों (Outer Himalayas) की तलहटी में स्थित मानव-निर्मित (man-made) वर्षा-आधारित मीठे पानी का जलाशय और वेटलैंड है। यह लगभग 3 वर्ग किमी (लगभग 565 एकड़) क्षेत्र में फैला है। इसकी कैचमेंट एरिया करीब 10,395 एकड़ में फैली है, जो चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में बंटी हुई है।
इतिहास:
1958 में ले कोर्बुज़िए (Le Corbusier) और मुख्य अभियंता पी.एल. वर्मा के मार्गदर्शन में मौसमी सुखना छो (Sukhna Choe) पर 12.8 मीटर ऊँचा मिट्टी का बाँध बनाकर इसे बनाया गया। शुरू में गाद (silt) की समस्या बहुत थी; 1988 तक इसकी जल धारण क्षमता 66% कम हो गई थी। बाद में कैचमेंट में वनस्पति और संरक्षण के प्रयास किए गए। 1988 में इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया गया। आसपास सुखना वन्यजीव अभयारण्य (1998 में घोषित, लगभग 26 वर्ग किमी) भी है। मार्च 2020 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे कानूनी इकाई घोषित किया था।
पारिस्थितिकी और जैव विविधता:
यहाँ खुले पानी, उथले किनारे की वनस्पति, झाड़ियाँ और जंगल जैसे विभिन्न आवास हैं। यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ रहने वाले और प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन, आराम और सर्दियों का आश्रय उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण प्रजातियाँ:
संवेदनशील (Vulnerable): कॉमन पोचार्ड (Aythya ferina)
लुप्तप्राय (Endangered): पैलास फिश ईगल (Haliaeetus leucoryphus)
लुप्तप्राय: ब्लैक पॉन्ड टर्टल (Geoclemys hamiltonii)
अन्य: साइबेरियन डक, स्टॉर्क, क्रेन आदि प्रवासी पक्षी; साम्बर हिरण, चीतल, जंगली सुअर आदि।
यह चंडीगढ़ का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है—बोटिंग, जॉगिंग, पक्षी दर्शन, सूर्योदय-सूर्यास्त और शिक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल होता है।
महत्व
शहरी क्षेत्र के पास होने के कारण यह जैव विविधता का शरणस्थल, जल और गाद नियंत्रण का नियामक तथा मनोरंजन-शिक्षा का केंद्र है। रामसर दर्जे से अंतरराष्ट्रीय संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी मजबूत होगी।
सौज झील (Sauj Jheel), मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
स्थान और प्रकृति:
यह मैनपुरी जिले की किशनी/करहल तहसील में गंगा के बाढ़ मैदान (floodplain) में स्थित उथली (shallow) मौसमी/स्थायी झील है। क्षेत्रफल लगभग 40.7–41 हेक्टेयर है। यह कृषि भूमि और मानव बस्तियों से घिरी हुई है। मुख्य जल स्रोत कृषि अपवाह और वर्षा है। समान पक्षी अभयारण्य (Saman Bird Sanctuary, 2019 में रामसर साइट) से करीब 3–5 किमी दूर है।
पारिस्थितिकी और जैव विविधता:
यह Indo-Gangetic Plains का हिस्सा है और व्यापक वेटलैंड नेटवर्क में पारिस्थितिक कनेक्टिविटी बढ़ाती है। यहाँ कमल (Nelumbo nucifera) और जंगली गन्ना (Saccharum spontaneum) जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं, जो घोंसला बनाने और भोजन का स्रोत बनती हैं।
जैव विविधता:
नियमित रूप से 30,000 से अधिक जल पक्षी आते हैं।
लगभग 43–96 पक्षी प्रजातियाँ, 19 मछली प्रजातियाँ और 7 सरीसृप प्रजातियाँ।
महत्वपूर्ण प्रजातियाँ: संवेदनशील सारस क्रेन (Grus antigone), ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (Clanga clanga); ग्रेट व्हाइट पेलिकन, ग्रेलेग गूज, बार-हेडेड गूज, रडी शेल्डक, पेंटेड स्टॉर्क, एशियन ओपनबिल, ब्लैक-हेडेड आइबिस आदि। BirdLife International द्वारा Important Bird and Biodiversity Area (IBA) घोषित (IN-UP-20)।
महत्व:
मैनपुरी अब भारत का एकमात्र जिला है जहाँ दो रामसर साइटें हैं (समान + सौज)। उत्तर प्रदेश में रामसर साइटों की संख्या 14 हो गई (देश में दूसरे स्थान पर)। यह प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण शीतकालीन आश्रय और स्थानीय जैव विविधता का केंद्र है।
खतरे और प्रबंधन
मुख्य खतरे: चरने वाले पशु और मछली पकड़ना। योजना में घोंसला बनाने वाले क्षेत्रों में प्रवेश, चराई और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध तथा नियंत्रित उपयोग शामिल है।
रामसर कन्वेंशन क्या है?
रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया अंतरराष्ट्रीय समझौता है (1975 से लागू)। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों (झील, दलदल, नदी आदि) का संरक्षण और बुद्धिमान उपयोग (wise use) करना है। भारत 1982 में इसका सदस्य बना। रामसर स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि माने जाते हैं।
भारत में रामसर स्थलों की स्थिति (अक्टूबर 2026 तक)
कुल संख्या: 103
एशिया में सबसे अधिक, दुनिया में तीसरे स्थान पर (यूके और मेक्सिको के बाद)।
तमिलनाडु में सबसे अधिक (20), उत्तर प्रदेश में 14 (सौज झील के बाद)।
इससे पहले अगस्त 2026 में अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील (Glaw Lake) 101वाँ स्थल बनी थी।
ये नए स्थल जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने में मदद करेंगे। सरकार की ‘अमृत धरोहर’ पहल के तहत आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।
