ग्लाव झील (Glaw Lake / Glow Lake / Glaw Tuwi) अरुणाचल प्रदेश का पहला और भारत का 101वाँ रामसर स्थल है।
रामसर स्थल की घोषणा: 21 जनवरी 2026 को रामसर सम्मेलन द्वारा इस झील को रामसर स्थल घोषित किया गया। 03 अगस्त 2026 को भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिकारिक तौर पर इसे भारत का 101वां रामसर स्थल के रूप में नामित किया गया।
स्थान: लोहित जिले में, वक्रो (Wakro) कस्बे के पास (लगभग 18-20 किमी दक्षिण-पूर्व में), कामलंग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के अंदर। पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित।
ऊँचाई: लगभग 1,168 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।।
प्रकार: प्राकृतिक मीठे पानी की झील (freshwater wetland)। सदानीरा पहाड़ी धाराओं से पानी मिलता है।
क्षेत्रफल: रामसर स्थल के रूप में लगभग 129 हेक्टेयर (128.98 हेक्टेयर) बताया जाता है।
नदी से संबंध: यह कामलंग नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और पानी का भंडारण करती है।
ग्लाव झील (Glaw Lake) की पारिस्थितिकी जैव विविधता
ग्लाव झील पूर्वी हिमालय में स्थित एक उच्च-ऊंचाई वाली प्राकृतिक मीठे पानी की आर्द्रभूमि है। यह कामलंग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंदर लोहित जिले (अरुणाचल प्रदेश) में लगभग 1,168 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल विज्ञान (Hydrology) झील सदानीरा पहाड़ी धाराओं (perennial mountain streams) से पानी प्राप्त करती है।
यह वर्षा और धाराओं से आने वाले पानी को संग्रहित कर बफर का काम करती है।
कामलंग नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उच्च-ऊंचाई वाले मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में जल सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण और नीचे की ओर जल प्रवाह बनाए रखने में सहायक है।
वनस्पति (Flora) झील और उसके जलग्रहण क्षेत्र (catchment) में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। इनमें होलोंग, कैनेरियम, रोडोडेंड्रॉन आदि शामिल हैं।
49 ऑर्किड प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
घने जंगल (ओक, रोडोडेंड्रॉन आदि) से घिरी हुई है, जो एक समृद्ध सूक्ष्म जलवायु (micro-climate) बनाते हैं।
जीव-जंतु (Fauna) जल पक्षी: कई जल-निर्भर पक्षियों का आवास और शीतकालीन स्थल। विशेष रूप से गंभीर रूप से संकटग्रस्त व्हाइट-बेलीड हेरॉन (White-bellied Heron / Ardea insignis) के लिए महत्वपूर्ण।
सरीसृप और उभयचर: 20 से अधिक प्रजातियाँ।
स्तनधारी (कामलंग परिदृश्य सहित): चार बड़ी बिल्लियाँ — बाघ, तेंदुआ, क्लाउडेड तेंदुआ और स्नो तेंदुआ।
अन्य: हाथी, हूलॉक गिब्बन, स्लो लोरिस, कैप्ड लंगूर, मिश्मी टकिन, रेड पांडा, एशियाई काला भालू, सिवेट, हिरण, जंगली सूअर, जायंट स्क्विरल, फ्लाइंग स्क्विरल आदि।
उच्च-ऊंचाई वाले जलीय जैव विविधता का भंडार।
पारिस्थितिकीय सेवाएँ (Ecosystem Services)जल भंडारण और बाढ़ नियंत्रण।
कार्बन अवशोषण (carbon sequestration)।
स्थानीय जलवायु नियमन।
जैव विविधता संरक्षण और प्रवासी पक्षियों का आश्रय।
आसपास के समुदायों (विशेषकर मिश्मी जनजाति) के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व — वे इसे पवित्र मानते हैं।
सांस्कृतिक महत्व मिश्मी जनजाति (मिजु, डिगारो और इडु मिश्मी) इस झील को पवित्र मानती है। उनकी आस्था वन, वन्यजीव और प्रकृति के प्रति गहरी है, जो संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका को मजबूत बनाती है।महत्व और संरक्षणजल सुरक्षा, जलवायु लचीलापन, बाढ़ नियंत्रण और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण।
ग्लाव झील को भारत का 101वाँ रामसर स्थल और अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल 3 अगस्त 2026 को घोषित किया गया।
संरक्षण स्थिति: रामसर स्थल घोषित होने (3 अगस्त 2026) के बाद इसकी पारिस्थितिकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मिली है। कामलंग टाइगर रिजर्व के अंदर होने से पहले से ही यह संरक्षित क्षेत्र में है। वर्तमान में एकीकृत प्रबंधन योजना पर काम चल रहा है ताकि पर्यटन, अनुसंधान और संरक्षण संतुलित रहे।
संक्षेप में, ग्लाव झील एक नाजुक लेकिन समृद्ध उच्च-हिमालयी मीठे पानी का पारिस्थितिकी तंत्र है, जो वनस्पति, वन्यजीव और जल विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र की जैव विविधता, जल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
