भारत में बाघ गणना (All India Tiger Estimation & AITE) 2026 एक महत्वपूर्ण वन्यजीव सर्वेक्षण है, जो राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया (WII) द्वारा हर चार साल में आयोजित किया जाता है।
बाघ गणना 2026 दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है, जो न केवल बाघों की गिनती करता है, बल्कि सह-शिकारियों (जैसे तेंदुआ, जंगली कुत्ते, हाइना), शिकार प्रजातियों (जैसे सांबर, चीतल, गौर, बार्किंग डियर), निवास स्थान की गुणवत्ता, और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का मूल्यांकन भी करता है।
भारत का सबसे बड़ा टाइगर सर्वे 2026 की गणना 2025-26 में शुरू हो चुकी है, यह गणना 8.27 लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को कवर करेगी, जिसमें 65,000 से अधिक वन बीट शामिल हैं, और इसका रिपोर्ट मध्य 2027 में जारी होने की उम्मीद है।
इससे पहले वर्ष 2022 के टाइगर सर्वे के अनुसार भारत में कुल 3682 बाघ थे, 20 से अधिक राज्यों में 60,000 से अधिक वन अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा सर्वे किया गया था।
भारत में बाघ गणना का इतिहास और पृष्ठभूमि
भारत में बाघ गणना की शुरुआत 2006 में हुई थी, और तब से यह पांच चक्र पूरे हो चुके हैं (2006, 2010, 2014, 2018, 2022)। 2026 का चक्र दो दशकों की इस प्रक्रिया को चिह्नित करेगा।
पिछले चक्र (2022) में भारत में 3,682 बाघ दर्ज किए गए थे, जो वैश्विक जंगली बाघों की लगभग 75% आबादी है।
यह संख्या 2006 के 1,411 से काफी बढ़ी है।
भारत ने 2010 के सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा-पत्र में बाघों की संख्या दोगुनी करने का वादा किया था, जो 2022 तक पूरा हो गया।
भारत में बाघ गणना के वर्ष एवं बाघों की संख्या
| वर्ष | बाघों की संख्या |
|---|---|
| 2006 | 1,411 |
| 2010 | 1,706 |
| 2014 | 2,226 |
| 2018 | 2,967 |
| 2022 | 3,682 |
2026 की गणना 58 बाघ अभयारण्यों का मूल्यांकन करेगी (2022 में 51 थे), और इसमें जलवायु परिवर्तन प्रतिरोधकता, आक्रामक प्रजातियां, और सामुदायिक संघर्ष प्रबंधन जैसे नए संकेतक शामिल हैं।
भारत में 2026 में होने वाली बाघ गणना में कैमरा ट्रैप और AI सॉफ्टवेयर जैसी विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाएगा, जो बाघों के अनूठे धारियों के पैटर्न को पहचानेंगे। इस प्रक्रिया में पगमार्क और स्कैट विश्लेषण जैसी विधियों का भी उपयोग होता है, जिसके तहत वन अधिकारी और वैज्ञानिक मिलकर इन सबूतों को इकट्ठा करते हैं। इसके बाद डेटा का विश्लेषण एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है, और अंतिम रिपोर्ट 2027 में जारी की जा सकती है।
भारत में 2026 की बाघ गणना अखिल भारतीय बाघ अनुमान (AITE) राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और राज्य वन विभागों के साथ मिलकर की जा रही है। यह दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है, जो मुख्य रूप से M-STrIPES ऐप-आधारित डिजिटल निगरानी, कैमरा ट्रैपिंग और वैज्ञानिक दोहरी नमूना पद्धति का उपयोग करता है।
बाघ गणना की विधियां और प्रक्रिया – गणना वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित होती है, जिसमें शामिल हैं:-
कैमरा ट्रैप विधि –
बाघों के निवास स्थानों में पेड़ों पर ट्रैप कैमरे लगाए जाते हैं, जो किसी भी वन्यजीव के गुजरने पर उसकी तस्वीरें लेते हैं।
रात में तस्वीर लेने के लिए नाइट विजन क्षमता वाले कैमरे उपयोग किए जाते हैं।
इन तस्वीरों को एक विशेष AI सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाता है, जो बाघों की धारियों के अनूठे पैटर्न का विश्लेषण करता है।
यह सॉफ्टवेयर व्यक्तिगत बाघों की पहचान करता है और न्यूनतम संख्या का अनुमान लगाता है।
कैमरा ट्रैपिंग में हजारों कैमरे लगाए जाते हैं (उदाहरण – मध्य प्रदेश में 9,000, पहले 7,000 थे)। प्रत्येक ग्रिड (2 वर्ग किमी) में कैमरे 25 दिनों तक लगे रहते हैं।
कैमरा ट्रैपिंग- सर्वेक्षण के एक महत्वपूर्ण हिस्से में हजारों स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं। ये कैमरे वन्यजीवों की तस्वीरें लेते हैं, और व्यक्तिगत बाघों की पहचान करने के लिए एआई (AI) सॉफ्टवेयर द्वारा धारी पैटर्न (Stripe Patterns) का विश्लेषण किया जाता है।
पगमार्क और स्कैट (मल) विधि –
वन रक्षक बाघों के पगमार्क और चिन्हों की तलाश करते हैं।
यह विधि बाघ के पगमार्क और स्कैट (मल) का विश्लेषण करती है।
प्रत्येक बाघ का पगमार्क अलग होता है, और इसका उपयोग बाघों की पहचान के लिए किया जाता है।
स्कैट से डीएनए विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे गणना की सटीकता बढ़ती है।
वैज्ञानिक और अन्य तरीके –
प्रौद्योगिकी का उपयोग (M-STrIPES) 2026 की गणना पूरी तरह से पेपरलेस होगी। वन अधिकारी और स्वयंसेवक डेटा संग्रह के लिए M-STrIPES (Monitoring System for Tigers & Intensive Protection and Ecological Status) ऐप का उपयोग कर रहे हैं। यह ऐप जीपीएस ट्रैकर, रेंज-फाइंडर और अन्य उपकरणों से जानकारी एकत्र करता है।
लाइन ट्रांसेक्ट्स सर्वेक्षण – वन कर्मी पैदल चलकर सबूत इकट्ठा करते हैं, जैसे पगमार्क, मल, क्षेत्र चिह्न, पशु हत्याएं। 2 किमी के सीधे रास्ते चिह्नित किए जाते हैं, और इन रास्तों पर शाकाहारी जीवों की संख्या, वनस्पति डेटा और मानवीय प्रभावों को रिकॉर्ड किया जाता है।
शिकारी और आवास मूल्यांकन – वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए शिकार प्रजातियों (शाकाहारी जीवों) के गोबर के घनत्व और वनस्पति आवरण जैसे आवासों के डेटा भी इकट्ठा करते हैं।
रेडियो कॉलर विधि – कुछ मामलों में, बाघों को पकड़कर रेडियो कॉलर लगाकर उनकी गतिविधियों और संख्या का पता लगाया जाता है।
नोडल एजेंसियां- NTCA केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत प्रमुख एजेंसी है, जो WII और राज्य वन विभागों के साथ मिलकर इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास का आयोजन करती है।
वैज्ञानिक पद्धति – यह सर्वेक्षण वैज्ञानिक दोहरी नमूना पद्धति (Scientific Double Sampling Method) का उपयोग करता है, जिसमें जमीनी सर्वेक्षण और कैमरा ट्रैपिंग दोनों शामिल हैं।
जमीनी सर्वेक्षण – इसमें वनस्पति, मानवीय प्रभाव, और शिकार प्रजातियों के मल के नमूनों का अध्ययन करने के लिए वन क्षेत्रों में व्यापक पैदल सर्वेक्षण शामिल है।
डेटा विश्लेषण – एकत्र किए गए सभी डेटा को संकलित और विश्लेषण किया जाता है।
एआई और ऐप – छवि विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (धारी पैटर्न पहचान), और रीयल-टाइम डेटा अपलोड के लिए मोबाइल ऐप।
नई विशेषता – पहली बार कई राज्यों में अभयारण्यों के बाहर क्षेत्रीय वनों और कॉरिडोर से बाहर क्षेत्रों में गणना, ताकि बाघों की विस्तारित आबादी का आकलन हो सके किया जायेगा।
बाघ गणना का उद्देश्य – बाघों की संख्या का अनुमान लगाने के अलावा, यह सर्वेक्षण संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य, शिकार घनत्व और जंगलों पर मानव गतिविधि के प्रभाव का भी आकलन करता है।
इस प्रक्रिया में मास्टर प्रशिक्षकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं ताकि वन कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को प्रभावी डेटा संग्रह और वैज्ञानिक कार्य-प्रणालियों में प्रशिक्षित किया जा सके।
बाघ गणना समयरेखा
भारत में अखिल भारतीय बाघ अनुमान (AITE) 2026 – वर्ष 2025 मेंशुरू हो गया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी वन्यजीव गणना है और इसका लक्ष्य केवल बाघों की संख्या ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन करना है।
अखिल भारतीय बाघ अनुमान गणना नवंबर 2025 से शुरू होकर मार्च/अप्रैल 2026 तक चरणों में चलेगा, हालांकि कुछ क्षेत्रों में यह मई 2026 तक भी जा सकता है।
गणना के पहले चरण (डेटा संग्रह) की शुरुआत 1 दिसंबर 2025 को हुई है और यह लगभग अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी।
इस बार की गणना पूरी तरह से पेपरलेस होगी और इसमें बाघों के अलावा तेंदुआ, जंगली हाथी और अन्य बड़े मांसाहारी जीवों की भी गिनती की जाएगी।
तैयारी – 2025 में शुरू, कई राज्यों में नवंबर से ट्रेनिंग और फील्ड वर्क।
फेज 1-3 – दिसंबर 2025 से मार्च/अप्रैल 2026 तक डेटा संग्रहण (साइन सर्वे, कैमरा ट्रैपिंग)।
गहन चरण – जनवरी 2026 से कुछ क्षेत्रों में।
विश्लेषण – अप्रैल 2026 तक डेटा संकलन, मध्य 2027 में रिपोर्ट।
राज्यों में समय अलग-अलग – केरल में दिसंबर से अप्रैल; तेलंगाना में नवंबर 20-26, आंध्र प्रदेश में नवंबर से मार्च।
रिपोर्ट और परिणाम
प्रत्येक चार साल में राष्ट्रीय बाघ अनुमान किया जाता है।
2026 की बाघ गणना की प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू हो गई है और मार्च 2026 तक चलेगी।
पिछली गणना 2022 में हुई थी, जिसमें 3,682 बाघ पाए गए थे।
2026 की गणना की रिपोर्ट 2027 में आने की उम्मीद है।
यह रिपोर्ट भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा जारी की जाएगी।
राज्य-वार विवरण
मध्य प्रदेश – टाइगर स्टेट के रूप में जाना जाता है। 18,000 वर्ग किमी कवर, नए क्षेत्रों में गणना।
कर्नाटक – पांच अभयारण्यों पर फोकस, बाहर के क्षेत्रों में भी।
केरल – पेरियार और परंबिकुलम में 1,860 ग्रिड, मार्च 2026 तक।
आंध्र प्रदेश – नागार्जुन सागर टाइगर रिजर्व में 4 महीने, एनजीओ और छात्र शामिल।
तेलंगाना – 26,000 वर्ग किमी, 3,000 बीट।
झारखंड – पलामू के बाहर रांची, हजारीबाग आदि में पहली बार।
पश्चिम बंगाल – जनवरी 2026 से गहन गणना।
महाराष्ट्र – सह्याद्री में स्वयंसेवक भर्ती, दिसंबर 2025 से मई 2026।
महत्व और चुनौतियां
यह गणना वन्यजीव प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मानव-वन्यजीव संघर्ष, निवास दबाव, और संरक्षण योजनाओं में मदद करती है।
चुनौतियां –शिकार, जलवायु परिवर्तन, जूनोटिक रोग आदि महत्वपूर्ण चुनौतियां है।
भारत में बाघ संरक्षण
भारत में बाघ संरक्षण प्रयास दुनिया के सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं। भारत में बाघों की आबादी वैश्विक स्तर पर लगभग 75% है, और यह सफलता मुख्य रूप से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों से आई है।
1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर से लेकर वर्तमान तक, इन प्रयासों ने बाघों की संख्या को 2006 के 1,411 से बढ़ाकर 2022 में 3,682 तक पहुंचा दिया है।
नीचे इन प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
प्रोजेक्ट टाइगर – 1973 में शुरू हुई यह भारत की प्रमुख बाघ संरक्षण पहल है, जिसके तहत 53 बाघ अभयारण्य स्थापित किए गए हैं, जो लगभग 72,000 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करते हैं।
NTCA इस परियोजना का नेतृत्व करता है, जो बाघों, सह-शिकारियों, शिकार प्रजातियों और उनके निवास स्थान की निगरानी करता है। इसमें कैमरा ट्रैप, सांख्यिकीय फ्रेमवर्क और M-STrIPES सॉफ्टवेयर जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग होता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) – NTCA बाघ अभयारण्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है, साथ ही सरिस्का और पन्ना जैसे अभयारण्यों में बाघों का पुनःपरिचय करता है।
विशेष बाघ सुरक्षा बल (STPF) का गठन कमजोर क्षेत्रों में शिकार रोकने के लिए किया गया है।
WWF-इंडिया की भूमिका – WWF-इंडिया सात प्रमुख बाघ परिदृश्यों (जैसे तराई आर्क, सुंदरबन, सतपुड़ा-मैकल, ब्रह्मपुत्र, पश्चिमी घाट-नीलगिरी) में कार्य करता है। यह निवास स्थान बहाली, महत्वपूर्ण गलियारों का संरक्षण, और वन्यजीव व्यापार की निगरानी पर फोकस करता है। TRAFFIC इंडिया के साथ मिलकर प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण और न्यायपालिका को वन्यजीव कानूनों पर जागरूकता प्रदान करता है।
अंतरराष्ट्रीय एकीकृत बाघ निवास संरक्षण कार्यक्रम (ITHCP) IUCN द्वारा कार्यान्वित यह कार्यक्रम भारत सहित अन्य देशों में बाघ संरक्षण को बढ़ावा देता है।
संरक्षण के तरीके
निवास स्थान संरक्षण और बहाली – बाघ निवासों का विस्तार, कनेक्टिविटी बनाए रखना, और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना मुख्य फोकस है।
WWF-इंडिया कैमरा ट्रैपिंग और लाइन ट्रांसेक्ट विधियों से बाघों की गतिविधियों की निगरानी करता है, जिससे गलियारों की पहचान होती है।
शिकार रोकथाम – शिकार और निवास हानि से बचाव के लिए सख्त कानून लागू किए गए हैं। क्षमता निर्माण कार्यक्रम वन विभाग, पुलिस, सीमा शुल्क और अर्धसैनिक बलों के लिए आयोजित होते हैं।
समुदाय भागीदारी – मानव-बाघ संघर्ष कम करने के लिए पशु हानि पर वित्तीय राहत, सौर लाइटें, खेतों के चारों ओर खाइयां, और स्थायी आजीविका (जैसे जूट बैग उत्पादन, वर्मीकंपोस्टिंग, मशरूम/मधु संग्रहण) प्रदान की जाती हैं। जागरूकता कार्यक्रम गांववासियों और छात्रों के लिए चलाए जाते हैं, साथ ही वन निर्भरता कम करने के लिए स्मोकलेस स्टोव, बायोगैस और बायो-ब्रिकेट्स का प्रचार।
पर्यटन प्रबंधन – इको-टूरिज्म से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन सफारी वाहनों से बाघों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। कोर क्षेत्रों में वाहनों की संख्या सीमित करना, इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड वाहनों का उपयोग, और पर्यटकों को शिक्षित करना समाधान हैं।
उपलब्धियां –
बाघों की संख्या 2010 के 1,706 से दोगुनी होकर 2022 में 3,682 पहुंच गई, जो TX2 लक्ष्य की सफलता दर्शाती है।
सरिस्का और पन्ना में बाघों का सफल पुनःपरिचय।
अखिल भारतीय बाघ अनुमान (AITE) गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण। (अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2018 दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण होने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है। यह सर्वेक्षण 141 क्षेत्रों में 26,838 स्थानों पर 26,838 कैमरा ट्रैप का उपयोग करके 1,21,337 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया गया था। इन कैमरा ट्रैप ने वन्यजीवों की कुल 3.4 करोड़ से अधिक तस्वीरें खींचीं जिनमें से 76,651 बाघों की थीं। )
अंतरराष्ट्रीय सहयोग– अन्य बाघ देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते और क्षमता निर्माण।
चुनौतियां – मानव-बाघ संघर्ष – 2015-2020 में 200 से अधिक घटनाएं, जो प्रतिशोधी हत्याओं को जन्म देती हैं।
शहरीकरण, वन संसाधनों का बढ़ता उपयोग, और सशस्त्र संघर्ष क्षेत्रों में बाघ गायब हो रहे हैं।
पर्यटन प्रभाव – सफारी से निवास खंडित होना, शोर से बाघों का शिकार और प्रजनन प्रभावित।
अन्य – शिकार, जलवायु परिवर्तन, और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य प्रजातियों (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) का संरक्षण आवश्यक।
वर्तमान स्थिति और भविष्य
2023 में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे हुए, और भारत अब अन्य प्रजातियों के संरक्षण पर फोकस कर रहा है। 2026 की बाघ गणना से और बेहतर अंतर्दृष्टि मिलेगी। संरक्षण प्रयासों को जारी रखने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वैज्ञानिक डेटा साझाकरण, और इको-टूरिज्म प्रमाणन आवश्यक हैं।
