शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) भारत में 22 अप्रैल 2026 (विश्व पृथ्वी दिवस) को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित किया गया। यह भारत का 99वाँ रामसर साइट है, जिससे उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या 12 हो गई है।
यह घोषणा भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और देश को 100वें रामसर स्थल की ओर ले जाती है।
स्थान और भौगोलिक विवरण
जिला: अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
दूरी: अलीगढ़ शहर से लगभग 15-17 किमी दूर (गंगिरी रोड पर), शेखा गांव के पास
प्रकार: ताजे पानी की बारहमासी झील (perennial freshwater jheel)
उत्पत्ति: 1852 में ऊपरी गंगा नहर (Upper Ganga Canal) के निर्माण के बाद बनी
क्षेत्रफल: लगभग 25 हेक्टेयर (करीब 62 एकड़)
यह झील ऊपरी गंगा नहर प्रणाली से जुड़ी हुई है, जो इसे पूरे वर्ष पानी उपलब्ध कराती है।
जैव विविधता (Biodiversity): शेखा झील 249 पक्षी प्रजातियों का घर है, जिनमें 62 प्रजातियाँ पूरी तरह जलाश्रयी (wetland-dependent) हैं।
शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) के पक्षी प्रजातियों का विस्तृत विवरण
शेखा झील उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित एक बारहमासी ताज़े पानी की झील है, जो 249 पक्षी प्रजातियों का घर है। इनमें से 62 प्रजातियाँ पूरी तरह आर्द्रभूमि (wetland) पर निर्भर हैं। यह स्थल सेंट्रल एशियन फ्लाईवे का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ सर्दियों (नवंबर से फरवरी) में साइबेरिया, मध्य एशिया और हिमालयी क्षेत्र से हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं।
मुख्य प्रवासी पक्षी (Central Asian Flyway पर महत्वपूर्ण स्टॉपओवर):
बार-हेडेड गूस (Bar-headed Goose)
पेंटेड स्टॉर्क (Painted Stork)
नॉर्दर्न पिंटेल (Northern Pintail)
विभिन्न प्रकार की बत्तखें (ducks)
इंडियन रिवर टर्न (Indian River Tern)
सारस क्रेन (Sarus Crane)
अन्य वन्यजीव:नीलगाय (Nilgai / Blue bull)
काला हिरण (Blackbuck)
पाँच-पट्टी गिलहरी (Five-striped palm squirrel)
भारतीय नेवला (Indian mongoose)
सरीसृप (reptiles) और छोटे स्तनधारी (small mammals)
पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व (Ecological Importance) सेंट्रल एशियन फ्लाईवे का हिस्सा: सर्दियों में साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण विश्राम स्थल।
यहाँ 114+ प्रजातियाँ नियमित रूप से दर्ज की गई हैं (कुल रिकॉर्ड 249), जिनमें जलपक्षी, सारस, स्टॉर्क, बत्तखें, गीज़, रैप्टर्स (शिकारी पक्षी), वॉडर्स (कीचड़ में चलने वाले) और गीत-पक्षी शामिल हैं।
मुख्य श्रेणियाँ और प्रमुख प्रजातियाँ यहाँ पक्षियों को उनके आवास और व्यवहार के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
- जलपक्षी (Waterfowl – Ducks & Geese) – सबसे समृद्ध समूह – ये झील के पानी और किनारों पर सबसे अधिक दिखते हैं। सर्दियों में इनकी संख्या हजारों में पहुँच जाती है।
- बार-हेडेड गूज (Bar-headed Goose, Anser indicus): हिमालय पार करने वाला विश्व-प्रसिद्ध प्रवासी। झील पर बड़े झुंड में दिखता है।
- ग्रेलैग गूज (Graylag Goose, Anser anser): बड़ा भूरा गूस, स्थानीय और प्रवासी दोनों।
- नॉर्दर्न पिंटेल (Northern Pintail, Anas acuta): लंबी पूँछ वाली बत्तख, सर्दियों में बहुतायत।
- गार्गेनी (Garganey, Spatula querquedula): छोटी प्रवासी बत्तख।
- नॉर्दर्न शॉवेलर (Northern Shoveler, Spatula clypeata): चौड़ी चोंच वाली बत्तख, कीचड़ छानकर खाती है।
- गैडवॉल (Gadwall, Mareca strepera) और यूरेशियन वीजन (Eurasian Wigeon, Mareca penelope): सामान्य सर्दी की बत्तखें।
- नॉब-बिल्ड डक (Knob-billed Duck, Sarkidiornis melanotos): भारतीय उपमहाद्वीप की विशेष प्रजाति।
- रूडी शेलडक (Ruddy Shelduck, Tadorna ferruginea) और कॉटन पिग्मी-गूज (Cotton Pygmy-Goose, Nettapus coromandelianus): छोटी आकर्षक प्रजातियाँ।
- इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक (Indian Spot-billed Duck, Anas poecilorhyncha): स्थानीय निवासी।
- स्टॉर्क, सारस और आइबिस (Storks, Cranes & Ibises) पेंटेड स्टॉर्क (Painted Stork, Mycteria leucocephala): गुलाबी और काले रंग का सुंदर स्टॉर्क, झील पर बहुत आम। कीचड़ में मछली पकड़ता है।
- ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (Black-necked Stork, Ephippiorhynchus asiaticus): दुर्लभ और प्रभावशाली, साँप पकड़ने के लिए प्रसिद्ध (गैलरी में इसकी तस्वीर प्रसिद्ध है)।
- सारस क्रेन (Sarus Crane, Grus antigone): विश्व का tallest flying bird, उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी। यहाँ प्रजनन भी करता है।
- व्हाइट आइबिस (White Ibis) और स्पूनबिल (Spoonbill): लंबी चोंच वाले, पानी छानकर खाने वाले।
- अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियाँ इंडियन रिवर टर्न (Indian River Tern, Sterna aurantia): कमजोर (vulnerable) प्रजाति, नदी/झील पर मछली पकड़ती है।
- लिटिल ग्रीब (Little Grebe, Tachybaptus ruficollis): छोटा गोता लगाने वाला पक्षी।
- लेसर व्हिस्लिंग-डक (Lesser Whistling-Duck, Dendrocygna javanica): रात में सीटी जैसी आवाज़ निकालता है।
अन्य: विभिन्न हॉक, ईगल (raptors), वागटेल, स्टिंट, वार्बलर, फ्लाईकैचर, पेलिकन, क्रेन, शैंक्स आदि। कुल मिलाकर 40+ प्रकार के विदेशी प्रवासी पक्षी (जैसे सुर्खाव, जल मुर्गा, ब्लैक आइबिस) सर्दियों में दिखते हैं।
पक्षियों का महत्व और देखने का सबसे अच्छा समय सर्वोत्तम मौसम: नवंबर से फरवरी (सर्दी) — प्रवासी पक्षियों का पीक समय।
पारिस्थितिक भूमिका: ये पक्षी झील के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं — मछली, कीड़े-मकोड़े नियंत्रित करते हैं और बीज प्रसार में मदद करते हैं। शेखा झील पक्षी प्रेमियों (birdwatchers) के लिए स्वर्ग है।
रामसर स्थल बनने का महत्व: उत्तर प्रदेश अब रामसर स्थलों में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
यह स्थल पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण कूटनीति (environmental diplomacy) में भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
भविष्य की संभावना: इको-टूरिज्म का नया केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
रामसर स्थल घोषित होने के बाद इसकी प्रबंधन योजना (management plan) को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि लंबे समय तक संरक्षण बना रहे, जिससे पक्षी संख्या और भी स्थिर रहेगी।
रामसर साइट में 20 वेटलैंड्स के साथ तमिलनाडु शीर्ष पर उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर
इसके साथ ही रामसर साइट में 20 वेटलैंड्स के साथ तमिलनाडु शीर्ष पर बना हुआ है जबकि 12 वेटलैंड के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
वर्ष 2026 में शामिल किये गए इस 01 नए रामसर साईट के साथ भारत में अब रामसर साईट की कुल संख्या शतक से एक कदम शेष 99 हो गई है।