Last Updated on April 30, 2026 by gktimehindi
विश्व आर्द्रभूमि दिवस (02 फरवरी) 2026 के दो दिन पूर्व भारत 30 जनवरी 2026 को भारत ने दो नए रामसर स्थलों को नामित किया है।
उत्तर प्रदेश के एटा में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में स्थित छारी-ढांड को रामसर कन्वेंशन के तहत् अंतराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि के रूप में जोड़े गए, जिससे भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 98 हो गई है।
रामसर टैग से इन स्थलों को स्थायी प्रबंधन, संरक्षण और पर्यावरणीय गिरावट से सुरक्षा मिलेगी, साथ ही ईको-टूरिज्म, शिक्षा और शोध के अवसर बढ़ेंगे।
पटना पक्षी अभयारण्य (Patna Bird Sanctuary)
स्थान और क्षेत्रफल – पटना पक्षी अभयारण्य एटा जिले में स्थित उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है, लेकिन उत्तरी भारत में पक्षी संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र है। यह 108.8 हेक्टेयर (लगभग 1.09 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैला है।
यह एक मीठे पानी का ऑक्सबो झील (oxbow lake) है, जो आसपास के कृषि क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इसे 1991 में स्थापित किया गया था और अब यह उत्तर प्रदेश का 11वां रामसर स्थल है।
जैव विविधता- सर्दियों के दौरान यहां 50,000 से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं, जिनमें 178 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। प्रमुख पक्षी- रोज़ी पेलिकन, यूरेशियन स्पूनबिल, उत्तरी पिंटेल, सारस क्रेन (बड़ी संख्या में), ब्लैक फ्रैंकोलिन, एशियाई ओपनबिल, काली गर्दन वाला सारस, बैंगनी बगुला, बूटेड ईगल, सारस क्रेन, ग्रेटर कौकल और 44 दुर्लभ प्रजातियां। इनमें से 4 प्रजातियां IUCN की लुप्तप्राय सूची में हैं। पौधों की 252 प्रजातियां (71 परिवारों से, जिनमें 24 जलीय) यहां पाई जाती हैं।
स्तनधारी- नीलगाय, सियार, नेवला, गोह, जंगली बिल्लियां, साही। यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण शरण स्थल है।
आसपास के मीठे पानी के दलदल, जंगल और घास के मैदान निवासी पक्षियों और पौधों के लिए आदर्श आवास प्रदान करते हैं।
पारिस्थितिक महत्व- यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण शरण स्थल है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा इसे महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र (IBA) के रूप में नामित किया गया है। यह प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करता है तथा जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देता है।
सांस्कृतिक और अन्य महत्व- अभयारण्य के अंदर एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो इसे सांस्कृतिक महत्व प्रदान करता है। रामसर टैग से यहां ईको-टूरिज्म, पर्यावरण शिक्षा, शोध और स्थानीय रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
खतरे और संरक्षण- प्रमुख खतरे- कृषि विस्तार, प्रदूषण और जल स्तर में उतार-चढ़ाव। संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी, निगरानी और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।
अन्य जानकारी – पटना पक्षी अभयारण्य सर्दियों के महिनों में घूमने के लिए सबसे अच्छा रहता है। यह उत्तर प्रदेश का 11वां रामसर स्थल है। संरक्षण प्रयासों से इसे पर्यटन और शिक्षा के लिए विकसित किया जा सकता है।
छारी-ढांड (Chhari-Dhand) आर्द्रभूमि
छारी ढांड भारत का संरक्षित वन क्षेत्र है, कच्छ का पहला रामसर स्थल है, जो अब गुजरात का पांचवां रामसर साइट है।
स्थान और क्षेत्रफल- कच्छ के करण में फुले गांव के बन्नी घास (शुष्क घास) के मैदानों और नमक के दलदली मैदानों के बीच स्थित लगभग 227 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 80 वर्ग किलोमीटर जल निकायों से भरा है, जो मानसून के दौरान काफी विस्तारित हो जाता है। यह गुजरात का एकमात्र संरक्षण रिजर्व है और मौसमी खारे पानी की आर्द्रभूमि है।
जैव विविधता- यहां दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लगभग 200 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है जिसमें डालमेटियन पेलिकन, ओरिएंटल डार्टर, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, कॉमन क्रेन, ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो की बड़ी आबादी पाई जाती है। शुष्क भूमि की प्रजातियां भी मौजूद हैं, साथ ही स्तनधारी जैसे चिंकारा, कैराकल, रेगिस्तानी लोमड़ी, रेगिस्तानी बिल्ली और भेड़िए। सैकड़ों प्रवासी और निवासी पक्षी प्रजातियां यहां निवास करती हैं।
पारिस्थितिक महत्व- यह पश्चिमी फ्लाईवे पर प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्टॉपओवर है, जहां वे भोजन और आराम करते हैं। कच्छ के शुष्क परिदृश्य में यह मौसमी जल निकाय जैव विविधता के लिए आवश्यक है।
अनोखी विशेषताएं– यहां चिर बत्ती (घोस्ट लाइट्स) नामक रहस्यमयी रोशनी का फेनॉमेनन देखा जाता है, जो सूर्यास्त के बाद मैदानों पर दिखाई देती है। रामसर टैग से पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
खतरे और संरक्षण-प्रमुख खतरे- जलवायु परिवर्तन, शुष्कता और मानवीय हस्तक्षेप खतरे हैं। संरक्षण में गुजरात वन विभाग की भूमिका, साथ ही स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग आवश्यक है।
रामसर साइट में 20 वेटलैंड्स के साथ तमिलनाडु शीर्ष पर उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर
इसके साथ ही रामसर साइट में 20 वेटलैंड्स के साथ तमिलनाडु शीर्ष पर बना हुआ है जबकि 11 वेटलैंड के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
वर्ष 2026 में शामिल किये गए इन 02 नए रामसर साईट के साथ भारत में अब रामसर साईट की संख्या 98 हो गई है।

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